Tuesday, February 5, 2008

मंगलवार व्रत कथा


ॠषिनगर में केशवदत्त ब्राह्मण अपनी पत्नी अंजलि के साथ रहता था। केशव दत्त के घर में धन-सम्पत्ति की कोई कमी नहीं थी। नगर में सभी केशवदत्त का सम्मान करते थे, लेकिन केशवदत्त सन्तान नहीं होने से बहुत चिन्तित रहता था। उसकी पत्नी अंजलि भी सन्तान की चिन्ता में बहुत कमजोर हो गई थी। दोनों पति-पत्नी प्रति मंगलवार को मंदिर में जाकर हनुमान जी की पूजा किया करते थे। मंगलवार का विधिवत व्रत करते हुए उन्हें कई वर्ष बीत गए थे। ब्राह्मण बहुत निराश हो गया था, लेकिन उसने व्रत करना नहीं छोड़ा था। कुछ दिनों के बाद केशवदत्त हनुमानजी की पूजा करने के लिए जंगल में चला गया। उसकी पत्नी अंजलि घर में रहकर मंगलवार का व्रत करने लगी। दोनों पति-पत्नी पुत्र-प्राप्ति के लिए मंगलवार का विधिवत व्रत करने लगे। कुछ दिनों बाद अंजलि ने अगले मंगलवार का व्रत किया, लेकिन किसी कारणवश उस दिन अंजलि हनुमानजी का भोग नहीं लगा सकी। हनुमानजी को भोग लगाए बिना वह स्वयं भी भोजन कैसे करती? सो उस दिन अंजलि सूर्य छिप जाने पर भूखी ही सो गई। अगले मंगलवार को हनुमानजी को भोग लगाए बिना उसने भोजन नहीं करने का प्रण कर लिया। छ: दिन तक अंजलि भूखी-प्यासी रही। सातवें दिन मंगलवार को अंजलि ने हनुमानजी की पूजा की, लेकिन तभी भूख-प्यास के कारण अंजलि बेहोश हो गई। हनुमानजी ने उसे स्वप्न में दर्शन देते हुए कहा, उठो पुत्री! मैं तुम्हारे पूजा-पाठ से बहुत प्रसन्न हूं। तुम्हें सुंदर व सुयोग्य पुत्र होने का आशीर्वाद देता हूं। जब यह कहकर हनुमान जी अंतर्धान हो गए। तभी अंजलि की बेहोशी दूर हो गई। उसने जल्दी से उठ कर हनुमानजी को भोग लगाया और स्वयं भी भोजन किया। हनुमान जी की अनुकंपा से नौ महीने के पश्चात अंजलि ने एक सुंदर शिशु को जन्म दिया। मंगलवार को जन्म लेने के कारण उस बच्चे का नाम मंगल प्रसाद रखा गया। कुछ दिनों बाद अंजलि का पति केशवदत्त भी घर को लौट आया। उसने आंगन में खेलते मंगल को देखा तो अंजलि से पूछा, च्यह सुंदर बच्चा किसका है? अंजलि ने खुश होते हुए हनुमानजी के दर्शन देने और पुत्र प्राप्त होने का वरदान देने की सारी कथा सुना दी। लेकिन केशव दत्त को उसकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। उसके मन में पता नहीं कैसे यह कलुषित विचार आ गया कि अंजलि ने उसके साथ विश्वासघात किया है। अपने पापों को छिपाने के लिए अंजलि झूठ बोल रही है।
केशवदत्त ने उस बच्चे को मार डालने का संकल्प किया। एक दिन घर से बाहर कुछ दूरी पर बने हुए कुंए पर केशवदत्त स्नान के लिए गया। मंगल भी उसके पीछे-पीछे कुंए पर पहुंच गया। केशवदत्त ने स्नान के बाद मंगल को उठाकर उस कुंए में डाल दिया और चुपचाप घर लौट आया। अंजलि ने उस के साथ मंगल को नहीं देखा तो उससे पूछा, च् मैंने मंगल को आपके पीछे जाते देखा था। वह आपके साथ लौटकर क्यों नहीं आया? केशवदत्त ने कहा, मंगल तो मेरे पास कुंए पर पहुंचा ही नहीं। वह कहीं खेलने लग गया होगा. अभी केशवदत्त ने यह कहा ही था कि तभी मंगल दौड़ता हुआ घर लौट आया। केशवदत्त मंगल को देखकर बुरी तरह हैरान हो उठा। उसी रात हनुमान जी ने केशवदत्त को स्वप्न में दर्शन देते हुए कहा, तुम दोनों के मंगलवार के व्रत करने से प्रसन्न होकर, पुत्र-जन्म का वर दिया था। फिर तुम अपनी पत्नी को कुलटा क्यों समझते हो? यह कहकर हनुमानजी अंतर्धान हो गए। तभी बिस्तर से उठकर केशवदत्त ने दीपक जलाकर रोशनी की और अंजलि को जगाकर उससे क्षमा मांगते हुए स्वप्न में हनुमानजी के दर्शन देने की सारी कहानी सुनाई। केशवदत्त ने अपने बेटे को हृदय से लगाकर प्यार किया। उस दिन के बाद सभी आनंदपूर्वक रहने लगे। मंगलवार का विधिवत व्रत करने से उनके घर के सभी कष्ट नष्ट हो गए। इस तरह जो स्त्री-पुरुष विधिवत मंगल वार का व्रत करके, व्रत कथा सुनते हैं, हनुमानजी उनके सभी कष्ट दूर करके घर में धन-सम्पत्ति का भण्डार भर देते हैं। शरीर के सभी रक्त विकार के रोग भी नष्ट हो जाते हैं।

1 comments:

रीतेश रंजन said...

ये गद्य यह प्रदर्शित करता है की प्रभु के नाम पर कोई भक्त झूठ नहीं बोलता.. अतः हमें भी इसका पालन करना चाहिए..और भगवान के नाम पर झूठ नहीं बोलना चाहिए... हमेशा सत्य का आचरण करना चाहिए...